दुनिया घूमने का शौक हो या दुनिया बदलने का, किताबों से बढ़िया सस्ता और अनमोल जरिया शायद ही कोई हो।

किताबें पढ़ने का रुझान आप में नहीं है तो आप अपने को कई अद्भुत अनुभवों से वंचित कर रहे हैं। अपने अंदर छुपी असीमित संभावनाओं को एक मौका दीजिये, कुछ आनंद के पल दीजिये खुद को, पढ़िए एक किताब ....यूँ ही नहीं कहते किताबो को हमारा सब से अच्छा मित्र..

हमारे लेखक

Anup Shukla

अनूप शुक्ल

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अनुराग आर्य

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अच्छी किताबें न सिर्फ सोच सकारात्मक बनाती हैं बल्कि कई बार जीवन को नई दिशा भी दे देती हैं।

पुस्तकें

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सेल्फी बसंत के साथ – कमलेश पांडे (pre-booking)

सेल्फी बसंत के साथ (व्यंग्य संग्रह) – कमलेश पांडे (pre-booking)

लेखक – कमलेश पांडे

संभावित डिलिवरी – 25-30 दिसंबर 2017

 

व्यंग्य में इन दिनों बड़ी धकापेल मची हुई है। फेसबुक ट्विटर के चलते दिन में कई बार व्यंग्य ठेले जा रहे हैं। जितनी स्पीड से ये आ रहे हैं, उससे ज्यादा स्पीड से वे भुला दिये जा रहे हैं। ऐसे विकट स्पीडवान समय में कम रचनाकार रुककर ठहरकर सोच कर व्यंग्य दे रहे हैं। कमलेश  पांडे ऐसे व्यंग्यकारों में एक महत्वपूर्ण व्यंग्यकार हैं। अर्थशास्त्र के गहरे जानकार हैं, तो बाजार को खूब समझते हैं। राजनीति के नाम पर चल रहे खेल को खूब समझते हैं। फिर रुककर सोचने का धैर्य है उनमें। यह जल्दी नहीं रहती उन्हे अभी खटाक लिखो, पटाक छपाओ और झटाक महानता की दावेदारी पेश करो। आम तौर पर कमलेश पांडे पर्यवेक्षण के मोड में रहते हैं। देखते बहुत हैं, सोचते बहुत हैं, बोलते कम हैं।  यही सब बातें उन्हे अपने वक्त के अधिकतर व्यंग्यकारों से अलग करती हैं।

  • आलोक पुराणिक

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जूते की ईएमआई – आलोक पुराणिक (pre-booking)

एक से बढ़कर एक जानदार च शानदार चुटीले व्यंग्यों से सज़ा संग्रह “जूते की ईएमआई” अब उपलब्ध है प्री-बुकिंग के लिए।

लेखक – आलोक पुराणिक

आलोक को व्यंग्य के सौंदर्यशास्त्र और उसके व्याकरण की इतनी गहरी, नैसर्गिक सी समझ है कि उनको पढकर, और व्यंग्य लेखन को लेकर उनकी इस जिद और बेचैनी से बहुत कुछ सीखा जा सकता है। स्वयं के लिखे पर उनका अगाध भरोसा, और निरंतर कुछ नया करने की अहर्निश बेचैनी ही उनको सारे समकालीनों से अलग करती है। उनकी यही बेचैनी, और नये प्रयोग करने का  साहस मुझे उनका  प्रशंसक बनाता है।

उन्होंने लंबी रचनाएं भी लिखी हैं, कथात्मक व्यंग्य भी लिखे हैं और व्यंग्य में पगे निबंध भी खूब लिखे हैं। पर उनकी बदनामी और ख्याति उन एकदम छोटी, एकदम तात्कालिक घटनाओं पर तात्कालिक घटनाओं पर तात्कालिक व्यंग्यात्मक, आशु कवि की तरह, तुरंत रचे अर्थपूर्ण वनलाइनर अर्थात जुमलों के लिए है। मेरा मानना है कि जुमलेबाजी करना बेहद प्रतिभा मांगता है। आसान काम नहीं होता यह, जैसा कि पहली नजर में किसी को लगता होगा। जब तक व्यंग्य की कहन पर आपकी वैसी पकड़ न हो जैसी आलोक की है, तब तक आप मात्र एक दो वाक्य में वह चमत्कार पैदा नहीं कर सकते जो व्यंग्य भी हो, और जिसमें मात्र एक पंक्ति में ही कोई बहुत बड़ी बात भी कह दी गई हो। इसके लिये आपको समकालीन समाज, राजनीति, अर्थशास्त्र, बाजार और सारी दुनिया पर गहरी पकड़ तो चाहिये ही, साथ में व्यंग्य रचने का अद्भुत कौशल भी चाहिये।

डा. ज्ञान चतुर्वेदी, वरिष्ठ व्यंग्यकार और उपन्यासकार,

 

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सोलह गियर वाली सायकिल (कहानी-संग्रह) – Pre Booking

सोलह गियर वाली सायकिल (कहानी-संग्रह)

कहानियाँ यूं तो हर उम्र के लिए होती है। मगर इस कहानी संग्रह की खास बात ये है कि इसमे शामिल बारह कहानियाँ किशोर उम्र के बच्चों को पढ़ने में बहुत दिलचस्प लगेगी। बारह अलग-अलग लेखकों की कहानियाँ जहां व्यस्कों को किशोर उम्र के संसार में लेकर जाएगी तो वहीं उस उम्र की दहलीज़ पर खड़े बच्चों के लिए एक रोमांचक सफर की तरह प्रस्तुत होगी।

लेखक – अंतरा करवड़े, अनुराग आर्य, दिनकर शर्मा, गौतम राजऋषि, मनीषा शर्मा, मानवी वहाणे, पल्लवी त्रिवेदी, पूजा अनिल, प्रियंका ओम, रश्मि रविज़ा, रश्मि तारिका, वंदना अवस्थी दूबे

 

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