दुनिया घूमने का शौक हो या दुनिया बदलने का, किताबों से बढ़िया सस्ता और अनमोल जरिया शायद ही कोई हो।

किताबें पढ़ने का रुझान आप में नहीं है तो आप अपने को कई अद्भुत अनुभवों से वंचित कर रहे हैं। अपने अंदर छुपी असीमित संभावनाओं को एक मौका दीजिये, कुछ आनंद के पल दीजिये खुद को, पढ़िए एक किताब ....यूँ ही नहीं कहते किताबो को हमारा सब से अच्छा मित्र..

हमारे लेखक

Anup Shukla

अनूप शुक्ल

जबलपुर
Anup Shukla

पल्लवी त्रिवेदी

भोपाल
Anup Shukla

अनुराग आर्य

मेरठ

अच्छी किताबें न सिर्फ सोच सकारात्मक बनाती हैं बल्कि कई बार जीवन को नई दिशा भी दे देती हैं।

पुस्तकें

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Himoji Calendar 2018

हिन्‍दी के पहले चैट स्टिकर ‘हिमोजी’ की डिजाइनर अपराजिता शर्मा आपके लिए लाई हैं अपने इस हँसमुख पात्र की मोहक अदाओं पर आधारित हिमोजी कैलेंडर 2018. हिमोजी ने हिंदी के चैट स्टिकरों के रूप में लोगों को एक ऐसा उपकरण दियाा जिसकी मदद से हजारों लोगों ने अपने मन के भावों को आपसी चैट तथा अन्‍य सोशल मीडिया व्‍यवहारों में व्‍यक्‍त किया। अब हिमोजी के प्रशंसकों के पास यह पहला अवसर है कि वे इस आभासी चुलबुली पात्र को वास्‍तविक रूप में पाकर अपनी मेज पर सजा सकें। 26 पृष्ठ की इस कला पुस्तिका को डेस्‍क कैलेंडर का रूप दिया गया है तथा अपराजिता ने हर बारीकी को बेहद सूक्ष्‍म कलादृष्टि से सजाया है। कला पुस्तिका की थोडी सी प्रतियॉं ही खुली बिक्री के लिए जारी की जा रही हैं। अभी आर्डर कीजिए।

Rs.295.00 Rs.150.00
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आलोक पुराणिक -व्यंग्य का एटीएम


व्यंग्यकार आलोक पुराणिक पर केन्द्रित पुस्तक  ‘आलोक पुराणिक-व्यंग्य का ए.टी.एम.’

संपादन – अनूप शुक्ल

 

आलोक को व्यंग्य के सौंदर्यशास्त्र और उसके व्याकरण की इतनी गहरी, नैसर्गिक सी समझ है कि उनको पढकर, और व्यंग्य लेखन को लेकर उनकी इस जिद और बेचैनी से बहुत कुछ सीखा जा सकता है। स्वयं के लिखे पर उनका अगाध भरोसा, और निरंतर कुछ नया करने की अहर्निश बेचैनी ही उनको सारे समकालीनों से अलग करती है। उनकी यही बेचैनी, और नये प्रयोग करने का  साहस मुझे उनका  प्रशंसक बनाता है।

उन्होंने लंबी रचनाएं भी लिखी हैं, कथात्मक व्यंग्य भी लिखे हैं और व्यंग्य में पगे निबंध भी खूब लिखे हैं। पर उनकी बदनामी और ख्याति उन एकदम छोटी, एकदम तात्कालिक घटनाओं पर तात्कालिक घटनाओं पर तात्कालिक व्यंग्यात्मक, आशु कवि की तरह, तुरंत रचे अर्थपूर्ण वनलाइनर अर्थात जुमलों के लिए है। मेरा मानना है कि जुमलेबाजी करना बेहद प्रतिभा मांगता है। आसान काम नहीं होता यह, जैसा कि पहली नजर में किसी को लगता होगा। जब तक व्यंग्य की कहन पर आपकी वैसी पकड़ न हो जैसी आलोक की है, तब तक आप मात्र एक दो वाक्य में वह चमत्कार पैदा नहीं कर सकते जो व्यंग्य भी हो, और जिसमें मात्र एक पंक्ति में ही कोई बहुत बड़ी बात भी कह दी गई हो। इसके लिये आपको समकालीन समाज, राजनीति, अर्थशास्त्र, बाजार और सारी दुनिया पर गहरी पकड़ तो चाहिये ही, साथ में व्यंग्य रचने का अद्भुत कौशल भी चाहिये।

डा. ज्ञान चतुर्वेदी, वरिष्ठ व्यंग्यकार और उपन्यासकार,

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सूरज की मिस्ड कॉल – अनूप शुक्ल (pre-booking)

ऋग्वेद के गायत्री-मंत्र से लेकर समकालीन कवि सूर्यभानु मिश्र की कविता ‘ओ भाई सूरज’ तक साहित्य में सूर्य का सुघड़-परिष्कृत मानवीकरण आपने पहले भी देखा-पढ़ा और दुहराया होगा पर सूरज के इतने संवेदी रूप,जनजीवन से उसका ऐसा राब्ता, ऐसी मूल्य-चेतना और अपनी किरणों से उसका ऐसा आत्मीय लगाव कम ही देखा होगा।

इस संकलन ‘सूरज का मिस्ड कॉल’ में सूरज के इतने मूड, इतनी क्रियाएं, इतनी मुद्राएं और भंगिमाएं हैं कि आप मुग्ध हो जाएंगे . यहां नदी और ताल पर चमकता सूरज है, ट्रेन और हवाई जहाज में साथ चलता और बतियाता सूरज है, कोहरे की रजाई में दुबका सूरज है, अंधेरे के खिलाफ सर्च वारंट लेकर आता मुस्तैद सूरज है, ड्यूटी कम्प्लीट करने के बाद थका-हारा सूरज है और अपनी बच्चियों यानी किरणों पर वात्सल्य छलकाता पिता सूरज है।

इस सूर्य-संवाद की भाषा शास्त्रीय नहीं, समकालीन है. बहती  हुई, बोलती हुई हिंदी . वैसी ही हिंदी ,जैसी आज-कल सूरज के तमाम ‘क्लाइंट्स’ की  है . यह कहना बड़ा मुश्किल है कि इस संकलन में सूरज अनूप शुक्ल की आंख से दुनिया देख रहा है या अनूप शुक्ल सूरज की आंख से। यह सूरज दरअसल लेखक का आत्मरूप है।

  • प्रियंकर पालीवाल
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